एआई ने आपके खरीदारी का तरीका बदल दिया है। आप सोचेंगे कैसे। जी हां, आम दुकानदार से लेकर बड़े ब्रांड तक आज यही सोच रहे हैं। कुछ महीने पहले तक हम कुछ भी खरीदने के लिए गूगल पर सर्च करते थे, फिर अमेजन, फ्लिपकार्ट या मिंत्रा पर जाते थे, कीमत की तुलना करते थे, रिव्यू पढ़ते थे और फिर ऑर्डर करते थे। अब पूरा खेल बदल गया है।
चैटजीपीटी, जेमिनी, मेटा एआई और परप्लेक्सिटी जैसे एआई टूल्स ने शॉपिंग का बटन अपनी चैट के अंदर ही लगा दिया है। आप सिर्फ लिखते हैं, मुझे पंद्रह हजार के अंदर बेस्ट रनिंग शूज बताओ, और एआई सिर्फ लिस्ट नहीं देता। वह आपकी उपलब्ध जानकारी के आधार पर आपका साइज, आपका बजट, आपके पुराने पसंदीदा ब्रांड और आपके पैर की चौड़ाई जैसी पसंद को ध्यान में रखकर सीधे खरीदने का लिंक दे सकता है।
यहीं पर गूगल की नींद उड़ी हुई है। अभी तक गूगल सर्च का राजा था। सारा ट्रैफिक वहीं से आता था। ब्रांड गूगल विज्ञापन पर पैसा लगाते थे ताकि आप उनकी साइट पर आएं। लेकिन एआई शॉपिंग टूल्स ने बीच के पूरे स्टेप को काट दिया है। ओपनएआई ने अपने शॉपिंग फीचर्स को और तेज कर दिया है, जिसमें आप चैट में ही प्रोडक्ट की फोटो देख सकते हैं, साइज सेलेक्ट कर सकते हैं और जहां यह सुविधा उपलब्ध हो, वहां दूसरी वेबसाइट पर गए बिना खरीदारी पूरी कर सकते हैं। इसे ही कहते हैं एआई एजेंट आपका पर्सनल शॉपर बन गया है।
उसे पता होता है कि आपको किस तरह के कपड़े पसंद हैं, आपने पिछले महीने क्या देखा था और क्या पसंद किया था। आपकी पत्नी का जन्मदिन कब है, यह भी उसे पता है। वह खुद आपको याद दिलाएगा कि तुम्हें गिफ्ट लेना था, ये तीन ऑप्शन सबसे अच्छे हैं। गूगल पर आप सर्च करते थे, एआई पर आप बात करते हैं। आप उससे कई बार सवाल पूछ सकते हैं। छोटी से छोटी चीज के बारे में पूरी जानकारी ले सकते हैं। यही सबसे बड़ा फर्क है। इसका असर छोटे बिजनेस पर सबसे ज्यादा दिख रहा है।
पहले एक छोटी दुकान को गूगल पर रैंक करने के लिए एसईओ, विज्ञापन और इंस्टाग्राम रील्स सब कुछ करना पड़ता था। अब अगर उसका प्रोडक्ट एआई के कैटलॉग में जुड़ा है तो एआई खुद उसे सही कस्टमर के सामने ले आता है। वह अपने आप एआई शॉपिंग रिजल्ट में दिखने लगता है। अब ऑर्डर सीधे एआई चैट से आ रहे हैं, गूगल से नहीं। एआई सिर्फ सस्ता प्रोडक्ट नहीं बेचता, वह भरोसा बेचता है।
सवाल उठता है कि क्या गूगल खत्म हो जाएगा। जवाब है नहीं, लेकिन गूगल की भूमिका बदल जाएगी। गूगल अभी भी प्रोडक्ट खोजने के लिए बड़ा है, लेकिन आखिर में खरीदने की जगह अब एआई चैट बन रही है। गूगल ने भी अपना एआई मोड और शॉपिंग ग्राफ तेज किया है, लेकिन लोगों का भरोसा धीरे-धीरे चैट पर शिफ्ट हो रहा है। वजह है वहां फालतू की चीजें कम हैं। गूगल पर आप शूज सर्च करो तो विज्ञापन, स्पॉन्सर्ड लिस्ट और अलग-अलग फीचर के बाद असली रिजल्ट आता है। लेकिन चैटजीपीटी पर आप शूज सर्च करो तो तीन साफ ऑप्शन मिलते हैं, वे क्यों अच्छे हैं इसकी वजह मिलती है और कुछ मामलों में सीधे खरीदारी का विकल्प भी मिल जाता है।
खरीदने वाले को या यूजर को वही चाहिए, कम कन्फ्यूजन और ज्यादा सफाई। जेन ज़ी में अधिकतर टिकटॉक या एआई चैट पर भी सर्च कर रहे हैं। भारत के लिए यह बदलाव और भी बड़ा है। यहां लोग पहले से ही वॉट्सऐप पर दुकानदार से चैट करके शॉपिंग करते हैं। एआई शॉपिंग उसी आदत को बड़ा बना रहा है। आप हिंदी में लिखो और एआई आपको उसी बजट में प्रोडक्ट दिखा देगा। इसमें गूगल ट्रांसलेट वाली फील नहीं, बल्कि एकदम देसी शॉपर वाली फील आती है।
लेकिन हर अच्छी चीज के साथ जोखिम भी है। एआई शॉपिंग में सबसे बड़ा सवाल भरोसे और प्राइवेसी का है। एआई को आपके बारे में उतनी जानकारी मिल सकती है, जितनी संबंधित सेवा को आपकी बातचीत, खाते, कनेक्टेड सेवाओं या आपकी अनुमति वाले अन्य स्रोतों से उपलब्ध होती है। आप क्या खाते हैं, क्या पहनते हैं, कितना खर्च करते हैं—ऐसी जानकारी कुछ सेवाओं के पास हो सकती है। यहां तक कि अगर आप उससे पूछेंगे कि ‘मैं कौन हूं’ तो वह आपके उपलब्ध डेटा और बातचीत के आधार पर आपके बारे में जानकारी बता सकता है। आप किस तरह के इंसान हैं, आपको क्या पसंद है, आपके लिए क्या गलत है और क्या सही है। आपका लोगों के साथ व्यवहार कैसा है, यह भी उसे पता होता है। अगर यही डेटा गलत हाथ में चला गया तो क्या होगा। क्या वह वही प्रोडक्ट दिखा रहा है जो सबसे अच्छा है या वह दिखा रहा है जिस कंपनी ने उसे ज्यादा कमीशन दिया है। अभी तक इस पर कोई साफ नियम नहीं है।
आने वाले दो साल में शॉपिंग का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। गूगल सर्च खत्म नहीं होगा, लेकिन वह सिर्फ रिसर्च का टूल बनकर रह जाएगा, खरीदने का टूल नहीं। खरीदने की जगह एआई चैट ले सकती है।
कस्टमर के लिए सीख यही है कि एआई शॉपर बहुत काम का है, लेकिन आंख बंद करके उस पर भरोसा मत करो, कीमत एक बार खुद भी चेक कर लो। आखिर में पैसा आपका है, च्वाइस भी आपकी ही होनी चाहिए, चाहे सलाह एआई की ही क्यों न हो।
© सृजन | लेखक: Brij Mohan Tiwari

2 comments:
very nice.....
bhuat accha lekh h
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